JeeJeeJoJo Ki Jadui Yatra

सोने से पहले की कहानी – “जीजीजोजो की जादुई यात्रा”

एक छोटे से गाँव में, हरे-भरे खेतों और चमकती नदियों के बीच, दो प्यारे दोस्त रहते थे — जीजी और जोजो
जीजी बहुत समझदार और शांत स्वभाव की थी, जबकि जोजो बहुत चंचल और मजेदार, हमेशा नई चीज़ें खोजने में लगा रहता था। गाँव के सभी बच्चे उन्हें बहुत पसंद करते थे।

एक रात, जब आसमान में चाँद पूरा था और आसमान में तारे ऐसे चमक रहे थे जैसे किसी ने रेशमी कपड़े पर मोती बिखेर दिए हों, जीजी और जोजो दोनों अपनी-अपनी खिड़की से बाहर देख रहे थे। अचानक दूर आकाश में, एक सुनहरी रोशनी चमकी और धीरे-धीरे उनकी ओर आने लगी।

वो रोशनी एक छोटी जादुई चिड़िया के रूप में बदल गई। उसने फड़फड़ाते हुए कहा,
“जीजी, जोजो, मेरा नाम ‘तारा’ है, और मैं सपनों की घाटी से आई हूँ। वहाँ बच्चों के सारे सपने सच होते हैं, लेकिन हाल ही में घाटी पर अंधकार छा गया है। क्या तुम दोनों मेरी मदद करोगे?”

जीजी ने तुरंत कहा, “हाँ, हम जरूर मदद करेंगे।”
जोजो ने हँसते हुए कहा, “वैसे भी मुझे रोमांच पसंद है!”

तारा ने अपने सुनहरे पंख फैलाए और कहा, “तो चलो, जीजीजोजो की जादुई यात्रा शुरू होती है!”


यात्रा की शुरुआत
तारा ने अपने पंख में से एक सुनहरी पंखुड़ी गिराई। जैसे ही जीजी और जोजो ने उस पंखुड़ी को छुआ, वे हवा में उड़ने लगे। नीचे गाँव छोटा दिखाई दे रहा था, और ऊपर तारे इतनी करीब थे कि उन्हें छूने का मन करे।

कुछ ही पलों में वे एक दूसरी दुनिया में पहुँच गए — सपनों की घाटी। वहाँ रंग-बिरंगे फूल थे, बात करने वाले पेड़ थे, और आसमान में इंद्रधनुष टिका हुआ था। लेकिन घाटी के बीच में एक बड़ा, धुंधला बादल मंडरा रहा था, जिससे फूल मुरझा रहे थे और पेड़ चुप हो गए थे।


अंधकार से सामना
तारा ने बताया, “यह अंधकार भूलभुलैया राक्षस ने फैलाया है। वह बच्चों के सपनों को चुराकर अपने महल में बंद कर देता है।”
जोजो ने मुट्ठी बाँधी, “तो हमें उसके महल में जाना होगा!”

जीजी ने सोचा, “लेकिन हमें चालाकी से काम लेना होगा, ताकत से नहीं।”
तारा ने उन्हें एक नक्शा दिया, जिसमें महल तक पहुँचने का रास्ता बना था, लेकिन वह रास्ता पहेलियों और चुनौतियों से भरा था।


पहली चुनौती – बोलता पुल
वे घाटी के किनारे पहुँचे, जहाँ एक लकड़ी का पुल था। पुल ने गहरी आवाज़ में कहा,
“अगर आगे जाना चाहते हो, तो मेरा सवाल हल करो —
‘वो कौन सा शब्द है जो जब तुम्हारे साथ साझा किया जाए तो कम नहीं होता?’”

जीजी ने मुस्कुराते हुए कहा, “खुशी!”
पुल हँस पड़ा, “सही जवाब!” और वह उन्हें पार करने देने लगा।


दूसरी चुनौती – हंसी का जंगल
यह जंगल अजीब था — यहाँ ज़मीन पर हर जगह बुलबुले थे, और हर बुलबुले में एक हंसी कैद थी। लेकिन जंगल से गुजरने के लिए उन्हें सबसे सच्ची हंसी ढूंढनी थी।
जोजो ने अलग-अलग बुलबुले फोड़े, लेकिन उनमें नकली हंसी निकली। जीजी ने एक छोटा सा बच्चा देखा, जो धुंध में उदास बैठा था। उसने उसका खिलौना ठीक किया, और बच्चे की सच्ची, दिल से निकली हंसी एक बुलबुले में कैद हो गई।
उस बुलबुले ने जादुई रास्ता खोल दिया।


महल और राक्षस
अंत में वे महल पहुँचे। वहाँ भूलभुलैया राक्षस गहरी नींद में था, और उसकी छाती पर एक काला डिब्बा रखा था। तारा ने फुसफुसाया, “यही डिब्बा बच्चों के सपनों को कैद करता है।”

जोजो धीरे से राक्षस के पास गया, लेकिन उसकी एक आँख खुल गई। उसने दहाड़ लगाई, “मेरे सपनों को कोई नहीं ले सकता!”
जीजी ने डरने के बजाय कहा, “अगर तुम्हारे पास दुनिया के सारे सपने हैं, तो क्या तुम सच में खुश हो?”

राक्षस रुक गया। उसकी आँखों में पानी आ गया। “मैं अकेला था, इसलिए मैंने सपने चुरा लिए, लेकिन कोई मेरा दोस्त नहीं बना।”

जीजी ने कहा, “तो दोस्ती कर लो, और सपने लौटाओ।”
राक्षस ने सिर झुका लिया और डिब्बा खोल दिया। सारे सपने आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बनकर फैल गए। घाटी फिर से हंस पड़ी।


घर वापसी
तारा ने कहा, “जीजीजोजो, तुमने सिर्फ घाटी ही नहीं बचाई, बल्कि राक्षस को भी दोस्ती का रास्ता दिखाया।”
दोनों ने तारा से विदा ली, और सुनहरी पंखुड़ी ने उन्हें वापस उनके गाँव पहुँचा दिया।

रात को बिस्तर पर लेटे हुए जोजो ने कहा, “क्या सच में सब हुआ था या ये भी एक सपना था?”
जीजी ने मुस्कुरा कर कहा, “शायद… लेकिन याद रखो, जीजीजोजो जहाँ भी जाते हैं, खुशियाँ जरूर छोड़ आते हैं।”


और इस तरह जीजीजोजो के रोमांच की एक और जादुई कहानी खत्म हुई। गाँव के बच्चे अगले दिन तक इंतज़ार करने लगे, क्योंकि उन्हें पता था—जहाँ जीजीजोजो होते हैं, वहाँ नए सपनों का आगाज़ होता है।

समाप्त

मीठे सपने और खुशी भरे विचार लेकर सोइए — जीजीजोजो की अगली यात्रा आपका इंतज़ार कर रही है!